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ज़िन्दगी की शायरी

By Arpita in Poems » Short
Updated 10:25 IST Mar 18, 2017

Views » 238 | 1 min read

"ज़िन्दगी हमसे खेलती रही 

और हम शब्दों से खेलते रहे 

इस खेल खेल में 

कभी बन के बिखरते रहे 

कभी बिखर के संवरते रहे "

 

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