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व्यंग्य-कथाः नाम कमाएगा बेटाःः

By veerendra Dewangan in Rib Tickling
Updated 08:03 IST Oct 01, 2020

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व्यंग्य-कथा:
नाम अर्जित करेंगे पुत्रः मुझे
अभागे के घर जब बेटा पैदा हुआ, तब मैं खुशी से झूम उठा। जश्न मनाया; मिठाइयाँ Bandito; फटाके फोड़ा।
कब गुजरता गया और मैं खेती-किसानी में मशगुल हो गया। फसलों की बुआई, निंदाई, गुड़ाई और कटाई; बैलों की सानी-पानी, खेतों में खाद और घर-गृहस्थी के जाल में; मैं इस कदर उलझा कि मुझे पता ही नहीं चला कि बेटा जब दस साल का हो गया।
एक दिन मैंने गौरव किया कि खेती के लिए खरीदकर लाया गया यूरिया बगैर इस्तेमाल किया कम हो रहा है। ऐसे मौके पर स्वाभाविक रूप से नौकर पर शक होता है, जो मुझे भी हुआ।
मैंने उसे जानने के गरज से पूछा, तो वह गिड़गिड़ाकर बोला, ' बाल-बच्चे मर गए; भूकंप हो; अगर मैंने चोरी की है तो। '
पत्नी से पूछा, तो वह मुझेशा ही पड़ी, ' क्या बकवास करते हो? खेत में खुद आते हैं और घर में कोहराम मचाते हो। '
मैं हैरान, परेशान था कि आखिरकार यूरिया जा कहां रहा है? भूकम्प हो रहा है या आसमान ले उड़ रहा है! मैं इसी उधेड़बुन में था कि मैंने एक दिन देखा, मेरा लाडला भंडारगृह से कुछ चबाता हुआ निकल रहा है।)
मुझे खता हुई। मैं भंडारघाट फौरन पहुँचा। देखा, तो आज फिर कुछ यूरिया कम दिखाई दे रहा था। अब, मेरा शक यकीन में बदलने लगा कि हो-न- हो यही यूरियाखोर व थ है।
कार्य किया। हस्तक्षेप करने पर उसने कहा, जो ने उससे कहा कि मेरे होश फाख्ता हो गए, ' मैं पिछले पांच साल से यूरिया डकार रहा हूं। पर खेद का विषय है कि 'आम जनता की नाई' आपको अभी तक पता चल रहा है। बड़ी कमजोर निगाहें आमजन की तरह आपकी भी हैं; तभी तो देश का बंथधार हो रहा है। '
यह सुनकर मेरा रोंगटे खड़े हो गए। कारण कि मैंने सुन रखा था कि यूरिया मानव शरीर के लिए घातक होता है। वह स्लोवाक पायजन का काम करता है। कच्ची दारू में मिला दो, तो दारू को तेज करता है। तभी तो कच्ची दारूखोरों का खून पानी होने लगता है। वे पीले दिखने लगते हैं।
मैं उसे एक डाक्टर के पास ले गया। उनसे पूछा गया, ' डाक्टर साहब, यह इकलौता किसी 'माननीय' की ' पाँच वर्षों से यूरियाखरी कर रहा है। इसकी जांच-पड़ताल और इलाज करें तो करें! '
डाक्टर मुझे ऊपर से नीचे यूं घूरा, गोया कह रहे हों कि बड़े बौड़म हो तुम! यह किसी नेता कीai का एक सत्र से यूरिया का भक्षण कर रहा है और आपको हवा तक नहीं लग रही है। ऐसे में इस मुल्क का क्या होगा? कह वह यह कटु सत्य कह न बनी। कहते हैं, तो घर आए ग्राहक के रुठ जाने का डर था।
वह झपट्टा स्टेथोस्कोप उठाया। उसे बालक के पास और पीठ पर लगाया गया था। नबज टटोला मुंह, जीभ और नाक का आँकलन किया। कंठ को हौले से दबाया।
पश्चात एक पर्ची पर चंद लकीरें उकेर कर बोला, ' पहले ब्लड, यूरिन और स्टूल का टेस्टो। छाती और पीठ के एक्सरे लो; फिर से रिपोर्ट आओ। केवल कुछ बताऊंगा। '
जब ओखली में सिर दिया, तो मूसल से डरना कैसा? म मरता क्या न करता; नालाक को लेकर पैठोलाजी उद्योग गया। वहां सबका सैम्पल दिलवाले। तीन धंटे के बाद जब रिपोर्ट के बारे में डाक्टर के पास पहुंचे, तो डाक्टर रिपोर्ट देखकर उठल पड़ा।
रिपोर्ट को लहराते हुए बोला, ' ये तो कम हो गया है। आप कह रहे हैं कि लाडला पाँच साल से यूरिया खा रहा है। पर रिपोर्ट कह रही है कि यूरिया के भक्षण का लक्षण नहीं है। '
यह सुनकर मैं सिटपिटा गया। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि अब उन्हें कैसे यकीन दिलाऊं कि औलाद को इस क्षेत्र में महारत हासिल हो गई है।
कहा, ' हाथ कंगन को अर्शी क्या? सामने लड़का है। स्वयं पुष्टि कर रहे हैं। '
इसपर डाक्टर लड़के की ओर मुखातिब होकर मजाकिया लहजे में पूछा, ' क्यों बेटा, सच्ची-सच्ची बता! आप यूरिया खाता है ना !! '
' ... और नहीं तो क्या? मैं यूरिया खाता हूं। मुझे इसको खाने में बड़ा मजा आता है। ' लड़का बेझिझक बोला, तो डाक्टर की हंसी चली गई।
हंसते-हंसते बोला, ' ये हुई न मरनेवाली बात। मेरे भानजे की तरह। मेरा भांजा भी बचपन में खूब शकर खाता था। एक बार में जश्न मनाने पर रोता-चीखता-चिल्लाता था। पर बाद में फखर हुआ कि वह शकर खाने और उसे हजम करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने जिस तरीके से शक्कर स्कला किया है, उसको करने के लिए बहुतों को कई-कई जनम लेने पड़ेंगे। '
मै डाक्टर का मुँह तकता रह गया। उसका कथन जारी था, ' इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। जब सारा देश लोहा, सीमेंट, छड़, बांध, पुल, सड़क, पनडुब्बी, खेल मैदान, मैदान, वर्दी और न जाने क्या-क्या खा-खाकर पचा रहा है, तो आपका लाल भी यूरिया खाकर मजे से पछागा। मैं तो हूं कहता हूं कि यह बड़ा होनहार निकलेगा और यूरिया सहित वह सब चीजें पचा लेगा, जो दूसरे पचा नहीं पाते और सपोड जाते हैं। मेरी दुआ उसके साथ है। '
मैं अवाक सुनता भर रह गया।
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