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जान जाए, पर मोबाइल न जाए::

By veerendra Dewangan in Experiences
Updated 07:48 IST Sep 30, 2020

Views » 31 | 4 min read

जान हो, पर मोबाइल न हो ::
मोबाइल का चलन इस कदर बढ़ा हुआ है कि लोगों को याद ही नहीं रहता कि इसका इस्तेमाल कब करना चाहिए और कब नहीं? खासकर युवा वर्ग को! वह मोबाइल को खिलौने की तरह इस्तेमाल करता है। जब देखो तब, हाथ में पकड़ा हुआ रहता है। जरा-सा खाली समय मिलता है कि उसको देखना, उसे खेलना और उसपर सर्फिंग करना जरूरी समझता है।
आलम यह कि जिस घर मंे जितने सदस्य हैं, उतने मोबाइल हो गए हैं। लगभग 60-70 करोड़ उपभोक्ता मोबाइल के हैं। इससे मोबाइल का बिग बाजार सज गया है। लेकिन, मोबाइल के जीतने के फायदे हैं, उतने नुकसान भी हैं।
मोबाइल के अंधाधुंध इस्तेमाल से किसी और का नहीं, खुद उपभोक्ता का अहित हो रहा है। इससे दूसरे का नुकसान तब होता है, जब मोबाइल डीलर कार, जीप व मोटरसायकिल चालन के दौरान मोबाइल का बेधड़क इस्तेमाल करता है।]
यह वह दुस्साहस है, जो स्वयं के साथ-साथ दूसरों के लिए भी जानलेवा हैं। तब तब अत्यंत परिवर्तन होता है, जब किसी की बदमाशी या लापरवाही का खामियाजा नहीं होता और भोगता होता है। जबकि ऐसा करना लॉन प्रतिबंधित है। लोगों को प्रतिबंधों व कानूनों की कोई परवाह नहीं है। उसे अपना मनमर्जी जो रखना चाहिए।
अध्ययन से पता चलता है कि भारत में रोज़ाना होनेवाले सड़क हादसों के कारणों में एक कारण मोबाइल का बेधड़क इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा दृश्य आम है। आपने भी देखा होगा पढ़ा या सुना होगा। मोबाइल से बतियाते सेअते दो बाइक आपस में भिड़ गए। मोबाइल के कारण वाहन का बैलेंस बिगड़ा।खाई में गिराया जा रहा है। फलां अपनी जान गंवा बैठा। अमुक को किसी गाड़ीवाले ने ठोकर मार दी। गाड़ीवान मोबाईल की धुन में था। आदि-इत्यादि।
मोबाइल के प्रति दीवानगी की ये चंद बँगी है। इसके खामियाजा अभागे परिवारों को चुकानी पड़ती है? गर वह कमाऊ रहता है, तो उसकी आमदनी पर असर पड़ता है। मृत्यु की दशा में आय बंद हो जाता है। जीवित रहने की दशा में उसके इलाज मे इतना खर्च हो जाता है कि जमापूंजी निकल जाती है। जेवर-जेवरात फल जाते हैं। जमीन-जायदाद स्वाहा हो जाता है।
आंकड़े बताते हैं कि देश में मोबाईल के बेजा इस्तेमाल से हर साल लगभग 4200 दुर्घटनाएं होती हैं। लगभग 2000 लोग असमय काल के गाल में समा जाते हैं। साल-दर-साल तकरीबन 2000 परिवार अनाथ व बेसहारा हो जाते हैं।क्षति अपूरणीय है। इसलिए विकासशील की जरूरत है। इस क्षति को मोबाईल का बेवक्त इस्तेमाल न कर रोका जा सकता है।
लोग इतना तय कर लें कि वे वाहन चालन के दौरान इस खिलौने से दूर रहें। पेट्रोल पंप में मोबाईल से दूरी बनाएं रखेंगे। खतरनाक या जोखिमभरे पर्यटन स्थलों में सेल्फी के लालच से बचेंगे, तो बहुतेरों की जान बची रह सकती है।
माता-पिता को भी चाहिए कि वे अपने लाड़लों और नौनिहालों के मोबाइलप्रेम पर निगाह रखें। उन्हें वाहन राइडिंग के दौरान इसके उपयोग करने से बचाने वाले हैं।
केवल ठानने की जरूरत है। धीरज से काम लेंगी। जो बात करना जरूरी हो, तो साइड में रुककर करें। बात जरूरी न हो, तो पहुंच पहुंचकर करें। इतनी सावधानी से इस जानलेवा की समस्या का समाधान मुमकिन हो सकता है।
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