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चल एक नई शुरआत करते है

By Vijay Meghwal in Poems » Short
Updated 15:49 IST Oct 12, 2022

Views » 168 | 2 min read

चल एक नई शुरआत करते है 

 

जानता हूं सब खत्म हो गया 

एक बार फिर से मैं हार गया

आंखों में आज फिर आंसू है 

आंसुओं को पोंछ फिर हंसते है 

चल एक नई शुरुआत करते है 

 

बस एक हार ही तो है

ये अंत तो नहीं है

क्यूं हम मायूस होकर बैठे है 

देख कर लक्ष्य की तरफ

फिर उठ खड़े हो उठते है

चल एक बार फिर शुरुआत करते है

 

माना आसान तो नहीं है 

पर हार कर बैठना भी समाधान नहीं है

उम्मीद की माला में 

फिरसे मेहनत के मोती पिरोते है 

चल एक बार फिर शुरुआत करते है

 

हार कर ही जीत जायेगा 

ये ही इतिहास के पन्ने कहते है

विजय श्री भी उन्ही का अभिषेक करती हैं 

जो हालात को हराने के लिए तत्पर रहते है 

चल एक बार फिर शुरुआत करते है

 

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