Kamal

  • Ghar
    Kamal | 22-Jun-2016
    घर एक घर होता हैघर एक मंदिर होता हैघर एक स्वर्ग होता हैघर एक सपना होता हैघर एक अपना होता है घर बीना सब अधूरा लगता हैघर बीना कोई हमें पचन्ता नही हैघर बीना कोई हमें पूछता नही हैघर हमें शांती सुख देता है घर में हमारी जान अड़की हुई रहती हैघर में हमें सब कुछ मिलता हैघर में हमारा सारा परिवार रहता हैघरसे हम बहोत बहोत सारा प्रेम करते है
    0 likes
    55 Views 0 Comments
  • Jhingola
    Kamal | 23-Jun-2016
    चंदामामा का  झिंगोला    चंदामामा चंदामामा  माँ से कहता है मम्मी मम्मी  मुझे एक सी देवोना झिंगोला    मम्मी कहती बेटा में कैसे तुम्हारा नाप लेवू  तूम भागते हो इधर से उधर मेरे हाथ नहीं आते  तो में कैसे तुम्हारा नाप लेवू में कैसे बनाउ झिंगोला   मम्मी मम्मी मुझे बना  देवोना झिंगोला  तू कभी होता है बड़ा तो कभी होता है एकदम छोटा  में कैसे तेरा नाप लेवू मुझे नहीं समझता  में कैसे बनाउ झिंगोला   मम्मी मम्मी मुझे बना  देवोना झिंगोला तू कभी गायब होता है और  कभी एकदम से दिखता है  में कैसे नाप तेरा लेवू कैसे बनाउ तुझे झिंगोला 
    0 likes
    67 Views 0 Comments
  • Kamal | 27-Jun-2016
    Poems
    » Long
    यादगार    नाम था आपका सुमतिलाल  मति चलती थी बहोत तेज  निर्णय लेते थे सही बराबर  नहीं डरते थे किसीको हिंमतसे  मनमें आया वो करके बताते    प्यार दिया आपने ढेरसारा जुुनरमें जनम हुवा पढाई हुई  एकलौते थे आप माँ बापको सबको  लाडसे प्यारसे बचपन पाया  सबजन डरते थे हमेशा आपको  आप सबका ध्यान रखते थे    प्यार दिया आपने ढेरसारा बाई महाराज सबके लाडले थे बाबालाल  महरजसाब माता पिताकी सेवा करी जानसे आपके पिताजीने कपट उठाये आपके लिए माताने आपका शब्द कभी निचे नहीं गिराया उन्हींका ग्यान लिया और आगे बढते रहे    प्यार दिया आपने ढेरसारा साल ६१ आते ही व्यवसाय छोड़ दिया  दुसरे बच्चोंपे  नज़र रखि दुर धृस्टिसे बच्च्को सिखाया पानीमें दुबे तोह तरना सिखो उन्होंने भी आपसे बहोत कुछ पाया  बच्चोने सम्भाला कारबार सही ढंगसे    प्यार दिया आपने ढेरसारा  आपको बड़ी बड़ी बिमारी आयी घबराये नहीं हिम्मत हम सबको दी  नउ ऑपरेशन हुए आपके बड़े बड़े  बच्चोने बहूरनिंे पोता पोतीने सेवा करी  नियतिने बहोत ध्
    0 likes
    53 Views 0 Comments
  • Kamal | 01-Jul-2016
    स्मरण    दादासाको स्मरण करे हम घडी घडी  सब जंजोरोसे छूट जाते है आपके  आशीषसे सही सही    तीन साल कैसे बीते मालूम नहीं  समारा मिरायसे घर भर गया  आपके सुनी सब रेहगी    एक पल भी नहीं भूलते आपको  हम हमारे साथमें ये महसूस  होता है दिंरातको   आप क्यों रूठ गए हमसे क्या हो गई भूल हमारी  क्यों नहीं आते  क्यों नहीं दर्शन देते हमको    हम सब तरस रहे है आपकी यादसे  पोता पोती सबजन करते है आपकी बात  आप दिए हुवे संस्कारको याद करते पलपल है
    0 likes
    60 Views 0 Comments
Kamal does not have any followers
Kamal is not following any kalamkars