Shashikant Sharma

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  • माँ, तुम मुझसे ज़्यादा बहादुर हो....
    Shashikant Sharma | 29-Jun-2019
    Poems
    » Long
    तुमने मुझे पाल-पोश कर बड़ा किया, शायद अपने स्वार्थ के लिए, कि बड़ा होकर मैं तुम्हारी सेवा करूंगा, तुम्हारे दुख में साथ रहूंगा, लेकिन देखो ना, मैं कितना स्वार्थी निकला, जो तुम्हे छोड़ दिया, बोल दिया मेरे वेतन से तुम घर चला लेना, मैं फ़ोन किया करूंगा. _______________ मैंने ज़िद करी थी जब जाने की, तुम किसी कोने में रो रही थी, तुमने कई शहादतें देखीं हैं, इसलिए तुमने मुझे रोका था, मैं नासमझ सा उम्र के साथ आये जोश में निकल पड़ा घर से, तुम्हारे आशीर्वाद के लिए मेरी बीवी ने मुझे टोका था. _______________ माँ मैंने देखा था पापा को चाचा से बात करने में उलझे थे शायद, माँ मैंने देखा था छुटकी को मेरे पर्स में, तुम्हारी तस्वीर छुपाते हुए, किताबें लिए हुए पैर छुआ था जिसने मेरा, उस भाई को देखा था, आईने में देखा था मैंने मेरी बीवी को, आँचल में आंसू बहाते हुए. _______________ रोहित को देखा था मैंने मेरी वर्दी में खुद की कल्पना करते हुए, मेरी हिम्मत से बाहर था रोशनी को, मेरी पैरों से अलग करना, मे
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  • Tu meri narazgi hai
    Shashikant Sharma | 05-Jul-2019
    जब सब कुछ ठीक होता है, नहीं आती तुम्हारी याद मुझे, जब मैं नाराज़ होता हूँ, सिर्फ तभी तुम्हारा ख्याल आता है, मैं तुम्हारा गुनेहगार सा हूँ, तुम मेरी नाराज़गी जैसी.
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