Horn OK Please

By Aditya in Daily Musings
Updated 15:26 IST Feb 18, 2018

गांव खेड़े की सडकोंपे गाडी चलएहो कभी? जब दो गाड़ियां आमने सामने आती है ना, तब एक दूजे को सड़क से नीचे उतारने की कोसिस होती है। गाड़ी चाहे जो भी हो छोटी या बड़ी, इंसान चाहे जो भी हो मुसाफिर या स्थानीय, जज्बा वही होता है, "मैने नहीं उतरना है बस...!" जिसका जिगरा छोटा वह उतर जाता है और कौस्ते हुए आगे बढ़ता है, और जिसका गुरुर बड़ा वह सड़क पे रहता है और अपनी जीत पे मुस्कुराता है, इतराता है। आगे चलके शायद दांव पलट भी जाता होगा, पर वह एक पल जीतने या हरने का एहसास बना रहता है।
दोष सड़क का नहीं है भाई, दोष अपने दिलों का है। सड़क उतनी बड़ी होती है की दो गाड़ियां समांले, पर अपने दिल में इतनी जगा कहां के इंसान को समेटले...!
खैर, expressway पे पाले बढे लोग ये नहीं समज़्हेंगे, वहां तो लकीरे पहलेसे ही बनादी। वह तेरा ये मेरा, बस तेज बढ़ते रहो। तेजी के जमाने में हम सफर तो जल्दी पूरा कर लेते है, लेकिन हमसफ़र नहीं बना पाते और शायद सफर करनाही भूल जाते है, क्यों कुछ गलत कहा हमने? हैंजी...? 


OK TATA

 

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Comments

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Salil Natu 18-Feb-2018 14:50

That’s Deep bro